एक बात बांटनी थी तुमसे आज,
ये जो तुम रोज़ इधर उधर मेरे बारे पूछते रहते हो,
तो सोचा चलो मैं ही बता देता हूँ, कि,
मेरी उदासी की वज़ह अब,
'तुम' बिलकुल भी नहीं, सिर्फ यादें हैं,
भीगी चौखट की,
मेज पर सूखे फूलों की,
इस ओर के रेगिस्तान की
इस राख से उठते कश की
कल जो भी कुछ मैंने गाया और,
आज मैं जो भी कुछ लिखता हूँ,
उस की वज़ह अब, 'तुम' बिलकुल भी नहीं, सिर्फ यादें हैं.....
ये जो तुम रोज़ इधर उधर मेरे बारे पूछते रहते हो,
तो सोचा चलो मैं ही बता देता हूँ, कि,
मेरी उदासी की वज़ह अब,
'तुम' बिलकुल भी नहीं, सिर्फ यादें हैं,
भीगी चौखट की,
मेज पर सूखे फूलों की,
इस ओर के रेगिस्तान की
इस राख से उठते कश की
कल जो भी कुछ मैंने गाया और,
आज मैं जो भी कुछ लिखता हूँ,
उस की वज़ह अब, 'तुम' बिलकुल भी नहीं, सिर्फ यादें हैं.....
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