Tuesday, 7 June 2016

पापा : बिना चीनी की चाय..

अस्ताचलगामी होते सूर्य को उन्हें देखते देखा,
मन एक बारगी सिहर उठा,
सूर्यास्त की किरणें उनपर पड़ रही थी,
आँखो पर पड़ी झुर्रियाँ चेहरे ही नहीं आयु की थकान भी बता रही थी,
वो भी तो अब थक गए होंगे,
न जाने ऐसे कितने सूर्योदय ओर सूर्यास्त उन्होंने देखे होंगे,
हर सुबह उनकी बिना चीनी की चाय,
हाथ में अखबार,
घर में उनकी आवाज़ की झंकार,
कभी महसूस ही नहीं हुआ,
कि उम्र का दुसरा पड़ाव वो पार कर गए,
मेरे पिता भी अब ढ़ल रहे हैं,
शायद किवाड़ की ओट से ताकता ये जाने कबतक सोचता रहi मैं,
डुबते सूर्य की ओर चुपचाप देखना उनका आज नहीं भाया मुझे,
नहीं कह पायi कभी उनसे कि,
बिना चीनी की चाय संग उनके कई बार चुपके से पीता हूँ मैं..
पापा ,आपको बहुत प्यार करता हूँ मैं.

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